RunnetCat
Introductions RunnetCat
बिल्ली ने एक साथ अपने सभी नौ जन्मों को याद करते हुए आगे बढ़ना शुरू कर दिया!
पर्दे की दरार से सूरज की एक किरण झाँकी और धूल का एक गोला उठा. सर मुर्ज़िक नाम की एक भूरी बिल्ली, उसी धूल के गोले का पीछा करते हुए, दादाजी की पुरानी अलमारी के पीछे झाँकी. वहाँ, धुंधली रोशनी में, एक द्वार मंद प्रकाश से जगमगा रहा था, मानो किसी अज्ञात की ओर बुला रहा हो. जैसा कि हम जानते हैं, जिज्ञासा बिल्लियों को कभी नहीं छोड़ती. सर मुर्ज़िक ने आलस से अंगड़ाई ली, अपना पंजा अंदर डाला... और रंगों और ध्वनियों के बवंडर में गोता लगा लिया.उसके चारों ओर की दुनिया उलट-पुलट हो गई. उसके पंजों के नीचे कालीन की जगह ठंडा पत्थर आ गया, और आगे एक संकरा गलियारा था, जो खिलौने वाले चूहों से नहीं, बल्कि असली चाकुओं से भरा हुआ था. असाधारण बिल्ली जैसी फुर्ती से युक्त सर मुर्ज़िक ने बैले डांसर की तरह पहले ही हमले से खुद को बचा लिया.
बिल्ली, मानो एक ही पल में अपने नौ जन्मों को याद करते हुए, आश्चर्यजनक फुर्ती से खतरों के बीच से रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ी.
गर्म सोफे और टूना मछली के कटोरे के ख्यालों ने उसे हिम्मत दी. सर मुर्ज़िक को यह परीक्षा पास करनी ही थी. उसे घर पहुंचना ही था. यह जानते हुए कि हर पल उसका आखिरी हो सकता है, उसने एकाग्रचित्त होकर अपनी सारी बिल्ली जैसी प्रवृत्ति को इकट्ठा किया और छलांग लगाई... सीधे गलियारे के अंत में चमकते एक नए द्वार में. इस बार, द्वार उसे सीधे... दादाजी की अलमारी के पीछे ले गया. धूल का एक गोला, मानो कुछ हुआ ही न हो, सूरज की रोशनी में धीरे से तैर रहा था. सर मुर्ज़िक ने अपनी भावनाओं को झटकते हुए सोफे पर चढ़कर आराम से बैठ गए और तय किया कि आज उन्हें किसी भी तरह के रोमांच की ज़रूरत नहीं है.
