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| Nombre | Pandit Jagannath Granthawali |
|---|---|
| Versión de Android | 5.1+ |
| Publisher | A.K.Sharma |
| Tipo | BOOKS AND REFERENCE |
| Tamaño | 23 MB |
| Versión | 1.2.1 (2) |
| Ultima actualización en | 2025-12-03 |
| Downloads | 10+ |
| Consíguelo |
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Pandit Jagannath Granthawali
Introductions Pandit Jagannath Granthawali
पं जगन्नाथ का जन्म 24 años, 1939 समचाना, जिला रोहतक हरियाणा में हुआ । यह तीजों के त्योहार का दिन था । जिस समय तीज मनाई जा रही थी, औरतें पींघ झूल रही थी और गीत गा रही थी । एक तरह से जब इन्होने इस धरा पर अपने नन्हे कदम रखे तो प्रकृति का पूरा वातावरण संगीतमय था । अतः यही कारण है कि इनका संगीत से लगाव बचपन से ही है।पं जगन्नाथ की प्रथम शिक्षा तो उनके अपने घर से ही प्राप्त हुई क्योंकि इनके पूर्वज सभी विद्वान पंडित थे । संस्कृत की विद्या भी इन्हें घर से प्राप्त हुई । इनके पास रहने, इनके सानिध्य मात्र से ही संस्कृत भाषा का काफी अनुभव हो चुका था। केवल चार साल की उम्र में इन्होने, अपने पिताश्री की अनुपस्थिति में एक शादी समारोह में फेरे करवा दिये थे। उस समय स्कूली शिक्षा में इनकी रूचि नहीं थी, क्योंकि इनके ही घर में पाठशाला थी और इनके दादा जी विद्यार्थियों को पढ़ाया करते थे। पं जगन्नाथ को छह साल की उम्र में परिजनों ने Más información शिक्षा हेतु भेजा, जिस प्रथम गुरू ने इनका नाम रजिस्टर में लिखा था, वो इनके ही गांव के पंडित रामभगत जी थे । ये उनको ही अपना सत्गुरू मान कर उनके चरणों में रहने लगे। जब स्कूल में शनिवार के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होता तो गुरू जी इन्हें एक भजन सुनाने का अवसर जरूर देते । एक दिन उस समय के सिंचाई मंत्री चौ. रणबीर सिंह, जो कि स्वतन्त्राता सेनानी भी थे, वह इनके स्कूल में आए । उनके आगमन पर इन्होने एक स्वागत् गान खुद ही बनाया और सुना दिया । उस दिन के बाद सदैव गुरू जी ने उन्हें उत्साहित किया, बस यहीं से लिखने का क्रम शुरू हुआ।
पं जगन्नाथ पंडित लखमी चंद की कविताई से ही ज्यादा प्रभावित हुआ थे। इन्होने अपनी कविता कम गाई, परन्तु पंडित लखमीचन्द जी के बनाए हुए सभी सांग, भजनों को तरीके एवं मर्यादा से घड़वे-बैंजों पर गाया है ।
पं. जगन्नाथ द्वारा उनकी पहली रचना चौ. रणबीर सिंह, सिंचाई मंत्री, पंजाब के स्वागत् में लिखी व गाई थी ।
पं जगन्नाथ कभी भी रागनियों की तरफ प्रवृत नहीं हुए और न ही कभी किसी प्रतियोगिता में भाग लिया । Más información का सृजन व गायन किया है ।
पं जगन्नाथ के कथन में रचनाओं का पूरा शब्द कर्म संभालना मुश्किल है, जो बचपन में लिखा-वह जवानी में गुम हो गया और जो जवानी में लिखा वो बुढ़ापे में गुम हो गया । वैसे इस समय मेरे पास स्वरचित करीब सोलह इतिहास व आठ सौ भजन, उपदेश हाजिर हैं ।
पं जगन्नाथ के वर्तमान परिदृश्य में हरियाणवी संगीत काफी उन्नति पर है । जिसको आप बार-बार रागनी नाम से सम्बोधित कर रहे हैं - वह रागनी नहीं है, यह केवल हरियाणवी संगीत है, जिसको पहले समय में अश्लील समझते थे, वही किस्से वही कविता, जिसको आज सब सुनना पसन्द करते हैं । पं जगन्नाथ के कथनानुसार घड़ा-बैंजू तो मेरे जन्म से पहले भी प्रचलन में थे, परन्तु इनका प्रयोग करने वालों को अश्लील समझा जाता था । क्योंकि ज्यादातर आवारा किस्म के लोग खेतों में कोल्हूवों में इन्हें बजाया करते थे, गांव बस्ती में इस साज़ को बजाने की मनाही होती थी । मैंने सन् 1970 में घड़ा-बैंजू को अपनाया और काफी विरोध् के बावजूद भी मैंने इस साज़ को नहीं छोड़ा । Más información का इन वाद्यों के साथ तालमेल, इनकी जन स्वीकृति का कारण बना और आहिस्ता-आहिस्ता सारे समाज ने ही इस साज को स्वीकार कर लिया, यहां तक कि आकाशवाणी दिल्ली व दिल्ली दूरदर्शन पर हरियाणा की तरफ से मैंने घड़े-बैंजू पर सबसे पहले गाना गाया, जिसे दूरदर्शन ने भी सहर्ष स्वीकार किया । बार-बार मेरे कार्यक्रम दिल्ली दूरदर्शन से घड़े-बैंजू पर आते रहे, फिर जनता ने भी स्वीकार कर लिये ।पं जगन्नाथ को हरियाणा सरकार ने अनेक बार सम्मानित किया। चौ. भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सहित पूर्व मुख्यमंत्रियों, चौ. बंशीलाल, चौ. देवीलाल, चौ. ओमप्रकाश चौटाला के कार्यकाल में एंव शथ बलराम जाखड़, चौ अजय चौटाला, श्री दीपेन्द्र हुड्डा के Más información मिला है । एशियाड 82 के समय एक एल. आई.जी. फलैट अशोक विहार दिल्ली में, इनको कार्यस्थल डी.डी.ए. ने सम्मान स्वरूप दिया । श्री साहब वर्मा, तत्कालीन मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल में दिल्ली सरकार की तरफ से तीन बार सम्मानित किया । श्री गुलाब सिंह सहरावत, उपायुक्त रोहतक ने एक किलो सौ ग्राम चांदी के डोगे से सम्मानित किया । गांव धराडू, भिवानी की पंचायत ने सोने का तमगा दे कर सम्मानित किया
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