Pandit Jagannath Granthawali
Introductions Pandit Jagannath Granthawali
Aplicativo Haryanvi ragni
पं जगन्नाथ का जन्म 24 de janeiro, 1939, जिला रोहतक हरियाणा में हुआ । यह तीजों के त्योहार का दिन था । जिस समय तीज मनाई जा रही थी, औरतें पींघ झूल रही थी और गीत गा रही थी । एक तरह से जब इन्होने इस धरा पर अपने नन्हे कदम रखे तो प्रकृति का पूरा वातावरण संगीतमय था । अतः यही कारण है कि इनका संगीत से लगाव बचपन से ही है।Você pode fazer isso sozinho. ही प्राप्त हुई क्योंकि इनके पूर्वज सभी Mais Isso é tudo. संस्कृत की विद्या भी इन्हें घर से प्राप्त हुई । इनके पास रहने, इनके सानिध्य मात्र से ही संस्कृत भाषा का काफी अनुभव हो चुका था। केवल चार साल की उम्र में इन्होने, अपने पिताश्री की अनुपस्थिति में एक शादी समारोह में Adeus करवा दिये थे। उस समय स्कूली शिक्षा में इनकी रूचि नहीं थी, क्योंकि इनके ही घर में पाठशाला थी और इनके दादा जी विद्यार्थियों को पढ़ाया करते थे। Não há nada melhor do que isso. गांव के ही प्राथमिक स्कूल में प्रारम्भिक Mais हेतु भेजा, जिस प्रथम गुरू ने इनका नाम रजिस्टर में लिखा था, वो इनके ही गांव के पंडित रामभगत जी थे । ये उनको ही अपना सत्गुरू मान कर उनके चरणों में Mais जब स्कूल में शनिवार के दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम होता तो गुरू जी इन्हें एक भजन सुनाने Mais जरूर देते । Isso é algo que você pode fazer. रणबीर सिंह, जो कि स्वतन्त्राता सेनानी भी थे, वह इनके स्कूल में आए । उनके आगमन पर इन्होने एक स्वागत् गान खुद ही बनाया और सुना दिया । उस दिन के बाद सदैव गुरू जी ने उन्हें उत्साहित किया, बस यहीं से लिखने का क्रम शुरू हुआ।
पं जगन्नाथ पंडित लखमी चंद की कविताख ज्यादा प्रभावित हुआ थे। इन्होने अपनी कविता कम गाई, परन्तु पंडित लखमीचन्द जी के बनाए हुए सभी सांग, भजनों को Mais मर्यादा से घड़वे-बैंजों पर गाया है ।
Então. जगन्नाथ द्वारा उनकी पहली रचना चौ. रणबीर सिंह, सिंचाई मंत्री, पंजाब के स्वागत् में लिखी व गाई थी ।
पं जगन्नाथ कभी भी रागनियों की तरब हुए और न ही कभी किसी प्रतियोगिता में भाग लिया । इन्होने तो सभी धार्मिक एवं ऐतिहासिक रचनाओं का सृजन व गायन किया है ।
पं जगन्नाथ के कथन में रचनाओं का पूरा शब्द कर्म संभालना मुश्किल है, जो बचपन में लिखा-वह जवानी में गुम हो गया और जो जवानी में लिखा वो बुढ़ापे में गुम हो गया । वैसे इस समय मेरे पास स्वरचित करीब सोलह इतिहास व आठ सौ भजन, उपदेश हाजिर हैं ।
पं जगन्नाथ के वर्तमान परिदृश्प संगीत काफी उन्नति पर है । जिसको आप बार-बार रागनी नाम से सम्बोधित कर रहे हैं - वह रागनी नहीं है, यह केवल हरियाणवी संगीत sim, जिसको पहले समय में अश्लील समझते थे, वही किस्से वही कविता, जिसको आज सब सुनना पसन्द करते हैं । पं जगन्नाथ के कथनानुसार घड़ा-बैंजू तो मेरे जन्म से पहले भी प्रचलन में थे, परन्तु इनका Adeus करने वालों को अश्लील समझा जाता था । क्योंकि ज्यादातर आवारा किस्म के लोग खेतोँ कोल्हूवों में इन्हें बजाया करते थे, गांव बस्ती में इस साज़ को बजाने की मनाही होती थी । मैंने सन् 1970 विरोध् के बावजूद भी मैंने इस साज़ को नहीं छोड़ा । कुछ नये प्रयोग और धार्मिक, ऐतिहासिक रचनाओं का इन वाद्यों के साथ तालमेल, इनकी जन स्वीकृति का कारण बना और आहिस्ता-आहिस्ता सारे समाज ने ही इस साज को स्वीकार कर लिया, यहां तक कि आकाशवाणी दिल्ली व दिल्ली दूरदर्शन पर हरियाणा की तरफ से मैंने घड़े-बैंजू पर सबसे पहले गाना गाया, जिसे दूरदर्शन ने भी सहर्ष स्वीकार किया । बार-बार मेरे कार्यक्रम दिल्ली दूरदर्शन से घड़े-बैंजू पर आते रहे, फिर जनता ने भी स्वीकार E लिये ।पं जगन्नाथ को हरियाणा सरकार ने अनेक बार सम्मानित किया। Sim. Você pode fazer isso sozinho. Bem, sim. Bem, sim. Bem, sim. ओमप्रकाश चौटाला के कार्यकाल में एंव श्री बलराम जाखड़, चौ अजय चौटाला, श्री दीपेन्द्र हुड्डा के कर कम्मानित होने का अवसर मिला है । 82 dias atrás. आई.जी. फलैट अशोक विहार दिल्ली में, इनको कार्यस्थल डी.डी.ए. ने सम्मान स्वरूप दिया । श्री साहब वर्मा, तत्कालीन मुख्यमंत्री दिल्ली सरकार ने अपने कार्यकाल में दिल्ली सरकार की तरफ से तीन बार सम्मानित किया । श्री गुलाब सिंह सहरावत, उपायुक्त रोहतक ने एक किलो सौ ग्राम चांदी के डोगे से सम्मानित किया । गांव धराडू, भिवानी की पंचायत ने सोने का तमगा दे कर Mais
